DK Shivakumar vs Siddaramaiah कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के डेढ़ साल बाद एक बार फिर सत्ता का संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान अब पार्टी हाईकमान के लिए सिरदर्द बन चुकी है।
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हालात ऐसे हैं कि राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं
- 👉 क्या कर्नाटक में कांग्रेस टूट के मुहाने पर खड़ी है?
- 👉 क्या जल्द ही मुख्यमंत्री बदला जाएगा?
- 👉 या यह अंदरूनी तनाव 2025 की राजनीति को बड़ा मोड़ देगा?
Background of the Conflict
कर्नाटक विजय के बाद ही यह चर्चा शुरू हुई थी कि CM पद के लिए 50-50 पावर शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ है — यानी 2.5 साल सिद्धारमैया और बाकी का समय शिवकुमार।
लेकिन अब सिद्धारमैया ने साफ कहा है कि वह पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
वहीं शिवकुमार ने एक बयान देकर राजनीति और भी गर्म कर दी —
“सभी 140 विधायक मेरे हैं।”
इस बयान को उनके शक्ति-प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
Latest Developments
कांग्रेस हाईकमान के मल्लिकार्जुन खड़गे ने हालात को देखते हुए सिद्धारमैया के साथ अहम बैठक की है, जिससे संकेत मिलता है कि मामला गंभीर हो चुका है।
इसके अलावा, शनिवार को होने वाली बैठकों को राजनीतिक पर्यवेक्षक “कर्नाटक का बड़ा फैसला” कहकर देख रहे हैं।
पार्टी के कई विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं और लॉबिंग जारी है।
आखिर संघर्ष की वजह क्या?
| कारण | विवरण |
|---|---|
| सत्ता का समीकरण | मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा |
| क्षेत्रीय नेतृत्व vs जनाधार | सिद्धारमैया OBC और ग्रामीण वोट बैंक से मजबूत, शिवकुमार दक्षिण कर्नाटक और संगठन से जुड़े |
| जाति समीकरण | शिवकुमार वोक्कालिगा समर्थन पर तो सिद्धारमैया दलित-OBC आधार पर |
| नेतृत्व मॉडल | सिद्धारमैया प्रशासनिक चेहरा, शिवकुमार रणनीतिक और संगठनात्मक चेहरा |
क्या कांग्रेस में टूट का खतरा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो स्थिति मध्य प्रदेश 2020 या राजस्थान 2022 मॉडल की ओर जा सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं:
- कांग्रेस के भीतर खुले विद्रोह और अनुशासनहीनता पार्टी के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
- भाजपा इस स्थिति को अपने राजनीतिक फायदे में बदलने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या?
तीन संभावनाएँ दिख रही हैं:
| विकल्प | परिणाम |
|---|---|
| शिवकुमार को CM बनाया जाए | अस्थायी समाधान लेकिन सिद्धारमैया समर्थक नाराज़ |
| सिद्धारमैया जारी रहें | शिवकुमार गुट में टूट या विद्रोह |
| हाईकमान ट्रांसफर-ऑफ-पावर मॉडल लाए | दोनों पक्षों को नियंत्रित कर कांग्रेस को एकजुट रखने की कोशिश |
कर्नाटक कांग्रेस इस समय सबसे बड़े आंतरिक राजनीतिक संकट से गुजर रही है।
यदि पार्टी हाईकमान समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो भाजपा के लिए यह बड़ा राजनीतिक मौका साबित हो सकता है और कांग्रेस सत्ता व संगठन दोनों स्तर पर नुकसान उठा सकती है।
डी.के. शिवकुमार का हालिया बयान
डी.के. शिवकुमार का हालिया बयान — “मेरे साथ सभी 140 विधायक हैं” — ने राजनीतिक हलकों में जोरदार प्रतिक्रिया उत्पन्न की है और इसे कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक सीधा संदेश माना जा रहा है।
जवाब में, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए “कोई रिक्ति नहीं है”, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है।
दोनों नेताओं के इन बयानों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज़ कर दिया है और सत्ता परिवर्तन की अटकलों को हवा दी है।
इसी बीच, विपक्षी दल, खासकर भाजपा, इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं और इसे सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर “आंतरिक गिरावट” का संकेत बता रहे हैं।
दोनों पक्षों के बढ़ते दबाव के बीच, यह माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान जल्द ही हस्तक्षेप कर सकता है ताकि कर्नाटक इकाई में संभावित बगावत या पार्टी टूट की स्थिति को रोका जा सके।
इन बयानों के बाद
🔹 राजनीतिक चर्चाएँ बढ़ गई हैं,
🔹 अफवाहों में और तेजी आई है,
और सवाल बड़ा ये कि —
👉 क्या कांग्रेस सरकार में जल्द बदलाव देखने को मिलेगा?
DK Shivakumar vs Siddaramaiah: 2025 मे कर्नाटक में फिर सत्ता संग्राम, क्या कांग्रेस टूट की कगार पर?
DK Shivakumar vs Siddaramaiah कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के डेढ़ साल बाद एक बार फिर सत्ता का संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान अब पार्टी हाईकमान के लिए सिरदर्द बन चुकी है।
